1डेटा मैपिंग और स्कोप तय करना in पुणे
पहला कदम दस्तावेज़ मैपिंग होता है, जिसमें बैंक स्टेटमेंट, टीडीएस, जीएसटी और लेखा रिपोर्ट जोड़ी जाती हैं। यह तरीका दिखाता है कि कौन-सा डेटा मौजूद है और कौन-सा गायब है, इसलिए पुणे की तेज़ कारोबारी समयसीमा में देरी कम होती है।
2रिकन्सिलिएशन चेक और अंतर पहचान in पुणे
In पुणे, फिर हम रीकन्सिलिएशन चेक करते हैं, ताकि वेतन, खर्च और कर क्रेडिट में फर्क साफ़ दिखे। पिंपरी-चिंचवड़ जैसी उत्पादन-आधारित जगहों में यह कदम खास जरूरी है, क्योंकि खरीद और स्टॉक एंट्रीज़ अक्सर अलग समय पर आती हैं।.
3रिटर्न ड्राफ्टिंग और अनुपालन क्रम in पुणे
In पुणे, इसके बाद कॉरपोरेट कर रिटर्न ड्राफ्ट बनाया जाता है, और आवश्यक प्रकटीकरण सही क्रम में रखे जाते हैं। यह चरण आयकर नियमों के अनुसार डेटा को पढ़ने योग्य बनाता है, जिससे बानेर और हिंजेवाड़ी के दफ्तरों में अनुमोदन आसान रहता है।.
4आंतरिक जाँच और दस्तावेज़ बंदी in पुणे
अंतिम जाँच में हम त्रुटि सूची, समर्थन दस्तावेज़ और अंतिम संस्करण को एक साथ देखते हैं। पुणे के कॉर्पोरेट ग्राहक इस चरण से समय बचाते हैं, क्योंकि अंतिम स्वीकृति से पहले बड़े संशोधन कम हो जाते हैं।