1दस्तावेज़ मैपिंग और स्रोत-सूची
पहले हम स्रोत-सूची बनाते हैं, जिसमें बैंक स्टेटमेंट, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, GST रिटर्न, AIS, TIS और Form 26AS शामिल रहते हैं। इस मैपिंग का उद्देश्य छूटे रिकॉर्ड और दोहराए डेटा को जल्दी पकड़ना है, ताकि फाइलिंग की नींव साफ रहे।
2ITR फॉर्म उपयुक्तता जाँच
इसके बाद ITR फॉर्म उपयुक्तता जाँच की जाती है, जिसमें व्यवसायिक संरचना, आय वर्ग और जरूरी शेड्यूल देखे जाते हैं। इससे गलत फॉर्म, अधूरी रिपोर्टिंग और बाद की संशोधन जरूरत कम होती है।
3AIS-26AS-GST मिलान कार्यपत्रक
हम एक मिलान कार्यपत्रक बनाते हैं, जहाँ AIS, Form 26AS, GST और खातों के आंकड़े साथ रखे जाते हैं। यह तकनीकी कदम बताता है कि अंतर किस स्रोत से पैदा हुआ, इसलिए ग्राहक को सुधार बिंदु साफ दिखते हैं।
4दावा और कटौती सत्यापन
यह चरण खर्च, कर क्रेडिट, व्यवसायिक दावे और उपलब्ध समर्थन दस्तावेज़ के आधार पर चलता है। इसका मकसद सिर्फ अधिक दावा करना नहीं, बल्कि टिकाऊ दावा दर्ज करना है।